छुईखदान विकास खण्ड में लाल ईंट का साम्राज्य
छुईखदान विकास खण्ड में लाल ईंट का साम्राज्य खनिज विभाग और वन प्रशासन की छत्र छाया ? ईंट पकाने कहा से आ रहा लकड़ी वन कटाई से पीएम आवास तक—किसके इशारे पर चल रहा खेल छुईखदान==छेत्र की पर्वत श्रृंखला और घने वनों से घिरा छुईखदान विकासखंड आज अवैध लाल ईंट कारोबार के शिकंजे में फँसता नजर
छुईखदान विकास खण्ड में लाल ईंट का साम्राज्य
खनिज विभाग और वन प्रशासन की छत्र छाया ?
ईंट पकाने कहा से आ रहा लकड़ी
वन कटाई से पीएम आवास तक—किसके इशारे पर चल रहा खेल
छुईखदान==छेत्र में स्थापित पर्वत श्रृंखला और घने वनों से घिरा छुईखदान विकासखंड आज अवैध लाल ईंट कारोबार के शिकंजे में फँसता नजर आ रहा है। क्षेत्र में सैकड़ों अवैध ईंट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासन मानो आँख मूंदे बैठा है।
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि—
ईंट पकाने के लिए जलाऊ लकड़ी आखिर आ कहाँ से रही है?पूरा विकासखंड लाल ईंट की आग में झुलस रहा है।छुईखदान के आसपास, छुईखदान–गंडई सड़क से लेकर महाराटोला, भोरमपुर, घिरघोली बाईकटोरी, नवागांव, बीरूटोला, घोघरे, छिंदारी, कानीमेरा, सिलपट्टी,साख़ा, कोर्राय हाठबंजा विचारपुर उदयपुर से आगे अतरिया बाजार रोड पर ईंट का अवैध निर्माण कर विक्रय किए जाने का खुलेआम चर्चा है ईंट पकाने हेतु इस क्षेत्र पर जंगली क्षेत्र वन विभाग जुडा हुआ है पूरा जंगल छेत्र तक पूरा विकासखंड लाल ईंट के धुएँ और साए में भभक रहा है।
जंगलों के भीतर ईंट बनाई जा रही है और शहरों में खुलेआम बेची जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या वन विभाग की मिलीभगत? या राजनीतिक संरक्षण?
क्या वन विभाग की जानकारी के बिना जंगलों से लकड़ी काटी जा रही है?
या फिर यह पूरा खेल ऊपर से मिले राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है?
पिछले वर्ष हुई कार्रवाई में भी “सेटिंग की बू” आज तक महसूस की जा रही है। लाखों की लागत वाले ईंट भट्ठों पर की गई कार्रवाई का आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। रसूखदार भट्ठा संचालकों को बचा लिए जाने की चर्चा आम है।
,,,,प्रतिबंध के बावजूद लाल ईंट का खुलेआम उपयोग,,,,
राज्य शासन द्वारा शासकीय निर्माण कार्यों में लाल ईंट के उपयोग पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद छुईखदान विकास खण्ड अंतर्गत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों में खुलेआम लाल ईंटों का इस्तेमाल हो रहा है।
क्या शासनादेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है?
हाल ही में लाल ईंट के भंडारण पर की गई कार्रवाई के बाद अब यह चर्चा जोरों पर है कि ईंट भट्ठा संचालक सत्ता के संरक्षण में काम कर रहे हैं।
छोटे मामलों में दिखावटी कार्रवाई कर बड़े और संगठित अवैध कारोबार को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
जनता पूछ रही है सवाल ...
यदि ईंट भट्ठे अवैध हैं, तो अब तक बड़े भट्ठों पर ताला क्यों नहीं लगा?
और यदि वैध हैं, तो वन कानून और शासनादेश आखिर किसके लिए हैं?
अब आम जनता खुलकर पूछ रही है—
क्या प्रशासन ने लाल ईंट माफिया को खुली छूट दे रखी है?
क्या कानून के रखवाले ही माफिया के साथ खड़े नजर आ रहे हैं?
यदि समय रहते निष्पक्ष और सख्त जांच नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में सिर्फ प्रशासनिक न




हीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विस्फोट बन सकता है।विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कुछ विभागीय कर्मचारियों का इस क्षेत्र में भ्रमण हुआ था लेकिन कोई अभी तक नजर नहीं आ रहा ।जिससे इस अवैध ईंट निर्माण के पर लगने लगे है।