बगैर नेवता घर घर पहुंचे छोटे राजा देवराज किशोर दास
बगैर नेवता घर घर पहुंचे छोटे राजा देवराज किशोर दास अक्ती में बच्चों संग निभाई परंपरा छेत्र में शादियों की धूम ,बच्चों में गुड्डे गुड़ियों का शादी बना यादगार
बगैर नेवता घर घर पहुंचे छोटे राजा देवराज किशोर दास



अक्ती में बच्चों संग निभाई परंपरा
छेत्र में शादियों की धूम ,बच्चों में गुड्डे गुड़ियों का शादी बना यादगार
छुईखदान — अक्षय तृतीया (अक्ती) के पावन अवसर पर क्षेत्र में पारंपरिक उत्साह और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस खास दिन नगर के “छोटे राजा” के नाम से प्रसिद्ध देवराज किशोर दास बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के घर-घर पहुंचे और बच्चों के बीच घुलमिलकर गुड्डे-गुड़ियों के टीकावान कार्यक्रम में शामिल हुए।
बच्चों का उत्सव बना अक्ती पर्व
अक्ती छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोक पर्व है, जिसे खासतौर पर बच्चों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चे अपने घरों में विवाह मंडप की तरह सजावट करते हैं और गुड्डे-गुड़ियों की शादी रचाते हैं। शाम को पीले चावल देकर टीकावान का पुरे मोहल्ले में निमंत्रण दिया जाता है, जो इस परंपरा का अहम हिस्सा है। इस पर्व में छोटे-बड़े सभी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
बच्चों के बीच पहुंचे “छोटे राजा” देवराज किशोर
हर साल की तरह इस बार भी “छोटे राजा” देवराज किशोर दास बच्चों के बीच पहुंचे और बच्चों के उत्साह को दोगुना कर दिया। ज्ञात हो कि बच्चे पूरे दिन उनके आने का इंतजार करते हैं और जैसे ही वे पहुंचते हैं, माहौल खुशियों से भर जाता है। उनका आत्मीय व्यवहार बच्चों और परिजनों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है।बच्चों की खुशी देखते बनती है जब छोटे राजा साहब का अचानक उनके मंडप पर आना हो जाता है और बच्चों को कुछ व्यवहार मिल जाता है।
घर-घर में अक्ती विवाह का मंडप सजाया गया
जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यह अनोखा उत्सव मनाया गया। ऐसे में देवराज किशोर दास की उपस्थिति इस परंपरा को और भी खास बना देती है और बच्चों में लोक संस्कृति के प्रति लगाव बनाए रखती है। पूरे छेत्र ने बच्चों के द्वारा घर घर में अक्ती विवाह का मंडप सजाया गया था ।जिसमें एक घर का मेहमान निकलकर दूसरे घर पहुंचता है ।ये सिलसिला देर रात तक चलते रहा ।
अक्ती पर बिना मुहूर्त के शादियां
वैसे तो साल भर कई शुभ मुहूर्तों में विवाह होते हैं, लेकिन अक्ती एक ऐसा दिन माना जाता है जब बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी विवाह संपन्न किए जाते हैं। जो छत्तीसगढ़ की परंपरा को महान बना देता है खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
शायद यही एक कारण जो अक्ती के दिन को पूरे नगर और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों विवाह आयोजित हुए हैं।
खासतौर पर उन जगहों पर अधिक उत्साह देखने को मिला, जहां बच्चों के बीच “छोटे राजा” देवराज किशोर दास की उपस्थिति रही।जब उनसे इस बारे में संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा यह हमारी संस्कृति है हमे इसे बचाने के लिए कुछ तो करना होगा ।