डॉ एम जी तिवारी अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कोलो प्रोक्टोलॉजी कार्यक्रम में हुए शामिल

डॉ एम जी तिवारी अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कोलो प्रोक्टोलॉजी कार्यक्रम में हुए शामिल कन्वोकेशन समारोह एवं कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन, इंदौर में हुआ कार्यक्रम 19 देशों के डॉक्टर शामिल, 400 से अधिक भारतीय चिकित्सकों ने लिया प्रशिक्षण

डॉ एम जी  तिवारी अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कोलो प्रोक्टोलॉजी कार्यक्रम में हुए शामिल

डॉ एम जी तिवारी अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कोलो प्रोक्टोलॉजी कार्यक्रम में हुए शामिल 

    कन्वोकेशन समारोह एवं कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन, 

     इंदौर में हुआ कार्यक्रम 19 देशों के डॉक्टर शामिल,

  400 से अधिक भारतीय चिकित्सकों ने लिया प्रशिक्षण

छुईखदान = नगर के सेवानिवृत्त सर्जन डॉ. एम. जी. तिवारी ने इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप प्रोक्टोलॉजी कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वोकेशन समारोह एवं कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया।

इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में विश्वभर के ख्यातिप्राप्त चिकित्सकों की उपस्थिति रही। जानकारी के अनुसार 19 देशों से आए डॉक्टरों ने इसमें सहभागिता की, वहीं भारत के लगभग 400 डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

       कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सर्जरी से जुड़ी नई एवं अत्याधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। बताया गया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब सर्जरी अधिक सुरक्षित, कम दर्दनाक और शीघ्र रिकवरी वाली हो गई है, जिससे मरीजों को तेजी से राहत मिलती है।

     डॉ. एम. जी. तिवारी, जो क्षेत्र के प्रतिष्ठित सर्जनों में गिने जाते हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में डॉक्टर को पूरी ईमानदारी से जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग नीम-हकीम के चक्कर में पड़कर बीमारी को गंभीर बना लेते हैं और देर से विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं, जिससे उपचार जटिल हो जाता है।उन्होंने बताया कि बवासीर भगंदर बड़ी बीमारी नहीं है ।अब उसका इलाज आसान तरीके से नई तकनीक के माध्यम से किया जाता है।

         

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विश्व स्तर पर अत्याधुनिक तकनीकों से ऑपरेशन किए जा रहे हैं और अब ये सुविधाएं धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर भी उपलब्ध हो रही हैं। इस प्रशिक्षण के दौरान नई तकनीकों के विश्लेषण एवं उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई, जो भविष्य में मरीजों के बेहतर उपचार में सहायक सिद्ध होगी।