अब्बू (मरहूम जामीन खान) की पांचवीं बरसी

अब्बू (मरहूम जामीन खान) की पांचवीं बरसी आज रमज़ान की छठवीं तारीख है… पाँच रोज़े पूरे होने के बाद, तरावीह की नमाज़ से पहले आपने हमें अलविदा कह दिया था। वो दिन, वो रात, वो सन्नाटा — आज भी आँखों के सामने खड़ा है।

अब्बू (मरहूम जामीन खान) की पांचवीं बरसी

       अब्बू (मरहूम जामीन खान) की पांचवीं बरसी पर 

            आज रमज़ान की छठवीं तारीख है…

पाँच रोज़े पूरे होने के बाद, तरावीह की नमाज़ से पहले आपने हमें अलविदा कह दिया था।

वो दिन, वो रात, वो सन्नाटा — आज भी आँखों के सामने खड़ा है।

             हर साल रमज़ान आता है, रौनक भी लाता है… मगर आपके बिना सब अधूरा सा लगता है।

              घर में चहल-पहल तो होती है, मगर सुकून कहीं खो सा गया है।आपकी कमी हर रोज़ महसूस होती है, खासकर इन मुबारक दिनों में।

मैं सज्जाक खान और मेरा बेटा मोहम्मद अर्श, मोहम्मद आज़म आज भी बाबा गुलाब शाह की खिदमत में लगे हुए हैं।और आपकी दी हुई सीख और दुआओं को अपनी राह बनाकर चल रहे हैं।

          अल्लाह तआला से दुआ है कि आपको जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मकाम अता फरमाए,आपकी क़ब्र को रौशन और वसीअ कुशीदा अता फरमाए ।

आपकी दुआओं की छाया हमेशा हम पर बनी रहे।

        आपकी यादें हमारे दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगी, अब्बू (बाजी) ????????

         

???????? ,,,,===हम सभी नतमस्तक हैं===,,,,????????

         सज्जाक खान,मोहम्मद अर्श,मोहम्मद आज़म