छुईखदान विकास खण्ड में सागौन की अवैध कटाई का खेल जोर शोर से
छुईखदान विकास खण्ड में सागौन की अवैध कटाई का खेल जोर शोर से रात के अंधेरे में हो रही जांच कब होगी कार्यवाही चौकीदार बीट गार्ड वनरक्षक और फॉरेस्टर रेंजर के ऊपर कब होगी कार्यवाही ???
छुईखदान विकास खण्ड में सागौन की अवैध कटाई का खेल जोर शोर से
रात के अंधेरे में हो रही जांच कब होगी कार्यवाही
चौकीदार बीट गार्ड वनरक्षक और फॉरेस्टर रेंजर के ऊपर कब होगी कार्यवाही ???
??????क्या दोषी कर्मचारियों को मिलेगी स





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छुईखदान=====छुईखदान विकास खण्ड के अंतर्गत तीन वन परिक्षेत्र है ।जिसमें छुईखदान गंडई साल्हेवारा लगभग वनाच्छादित छेत्र है जहां पर कीमती लकड़ी से लेकर खनीज संपदा कूट कूट कर भरा हुआ है ।जिसके अंतर्गत अंतर्गत खुडमुड़ी, जंगल*नवगांव और बैगिन बांध से लेकर पूरे विकास खण्ड में अवैध कटाई जोरशोर से चलने की खबर है जिसे लेकर इन दिनों इस क्षेत्र ने अवैध लकड़ी कटाई का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कीमती पेड़ों पर लगातार आरी चलाई जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस और सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। किसानों की जमीन में स्थित लकड़ियां की कटाई भी बगैर अनुमति के चल रहा है??
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक ऐसा पता चला है कि वन विभाग के उच्च अधिकारी अर्धरात्रि में जंगलों का निरीक्षण करने पहुंचे थे।उन्होंने देखा भी और मौके पर निरीक्षण भी किए जाने की खबर है।हालांकि, इस जांच के बाद भी किसी बड़ी जब्ती या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अवैध कटाई किसके संरक्षण में चल रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के घने जंगलों को अपूरणीय क्षति हो सकती है। पर्यावरण प्रेमियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जब वन कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी उसी क्षेत्र में रहती है, तो फिर खुलेआम अवैध कटाई कैसे संभव हो रही है? लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं न कहीं कर्मचारियों की मिलीभगत से इस अवैध कारोबार को संरक्षण तो नहीं मिल रहा। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बारूद के डर से कतराने लगे है वन कर्मी
ऐसा पता चला है कि रात के अंधेरे में कर्मचारी सर्चिंग करने से कतराते है । क्योंकि लकड़ी चोर जगह जगह गोला (बारूद बम्ब)बिछा दिए रहते है । जिससे बरहा को मारा जा सके।इस क्षेत्र में बरहा की तादात बढ़ गई है ।जो कि खेतों को नुकसान पहुंचाता है इसका फायदा लकड़ी चोर उठाते है । ज्ञात हो कि इस क्षेत्र में जंगली जानवरों के परिचलन की चर्चा भी है।जिसे लेकर ग्रामों में चौक चौराहे पर वन भैंसे से लेकर सागौन की कटाई शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, हालिया रात्रि निरीक्षण के बाद विभागीय अमले में हलचल जरूर देखी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिससे संबंधित लोगों में दहशत का माहौल है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और जंगलों की सुरक्षा के लिए क्या रणनीति अपनाई जाती है। क्षेत्रवासियों की नजरें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।