बीरेन्द्र बहादुर सिंह को डॉक्टरेट की मानद उपाधि
बीरेन्द्र बहादुर सिंह को डॉक्टरेट की मानद उपाधि नई दिल्ली में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से हुए विभूषित, छुईखदान में हर्ष
बीरेन्द्र बहादुर सिंह को डॉक्टरेट की मानद उपाधि
नई दिल्ली में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से हुए विभूषित, छुईखदान में हर्ष
छुईखदान === नगर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार बीरेंद्र बहादुर सिंह को द लुसियाना रिसर्च यूनिवर्सिटी (यूएसए) द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया गया है ।
नई दिल्ली के द महफ़िल ग्रैंड में गत दिनों आयोजित एक गरिमामय समारोह में विश्वविद्यालय की भारतीय प्रतिनिधि संस्था एशिया बुक आफ रिकॉर्ड फाउंडेशन ने छुईखदान नगर के बीरेंद्र बहादुर सिंह को साढ़े तीन दशक की पत्रकारिता एवं साहित्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया ।



हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान के अध्यक्ष बीरेंद्र बहादुर सिंह को डाक्टरेट की मानद उपाधि मिलने पर जय जगन्नाथ सेवा समिति, सुकवा साहित्य मंच एवं प्रेरणा क्लब प्रेस क्लब छुईखदान तथा उनके मित्रों और शुभचितको ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है ।
युवावस्था से ही रचनात्मक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहने वाले बीरेंद्र बहादुर की सिंह की पहचान 90 के दशक में एक लेखक के साथ संस्कृतिकर्मी और साहित्यिक - सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रमुख संयोजक की रही है । छुईखदान में 1992 से 2000 तक प्रतिवर्ष गणतंत दिवस के दिन आयोजित कवि सम्मेलनों, प्रेरणा के दशक समारोह, 1998 में हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान की स्वर्ण जयंती समारोह और लोक कला महोत्सवों के आयोजनों में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई है ।
1994 में उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत राजनांदगांव के प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक सबेरा संकेत से की । राजनांदगांव में कार्यरत होने के बाद भी अपनी जन्मभूमि छुईखदान नगर से उनका सतत् जुड़ाव बना हुआ है । इस दौरान उन्होंने नगर के प्रतिनिधि कवि डॉ. रतन जैन की एकमात्र काव्य संकलन " रक्त - पुष्प ", पंडित रमाकांत शर्मा की काव्य - कृति " दूर क्षितिज में " और गद्य संकलन " पृष्ठों का नीड़ " का न केवल संपादन किया अपितु उनके प्रकाशन से लेकर विमोचन तक प्रमुख भूमिका निभाई । वे अनेक स्मारिकाओं के संपादक मंडल में शामिल रहे हैं । छत्तीसगढ़ के मूर्धन्य लोक संगीतकार खुमान साव पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से प्रकाशित स्मारिका " श्रद्धांजलि खुमान साव " के तीन सदस्यीय संपादक मंडल में भी वे शामिल हैं । लोक मड़ई उत्सव समिति आलिवारा द्वारा 2023 में प्रकाशित स्मारिका " लोक मड़ई " का भी उन्होंने संपादन किया है ।
बीरेंद्र बहादुर सिंह मूल रूप से पत्रकार हैं लेकिन हिन्दी साहित्य के प्रति उनका गहरा लगाव है । अपने 32 वर्षों की अनवरत पत्रकारिता में सम सामयिक रिपोर्टिंग के साथ ही छत्तीसगढ़ की प्रदर्शनकारी लोककला, साहित्य, संस्कृति एवं इतिहास पर उन्होंने सार्थक एवं तथ्यपरक लेखन किया है । छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं और लोक कलाकारों पर उन्होंने शोधपरक एवं संग्रहणीय लेखन किया है । छुईखदान रियासत और नगर के 270 वर्षों के इतिहास पर आधारित और 2020 में प्रकाशित उनकी पुस्तक " छुईखदान परत दर परत " काफी चर्चित है । इस पुस्तक की लोक प्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस किताब की 20 से ज्यादा साहित्यकारों और पत्रकारी की समीक्षाएं अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई । छह माह के भीतर ही छुई खदान परत दर परत की समीक्षा " अनुगूंज " के नाम से प्रकाशित हुई ।
बीरेंद्र बहादुर सिंह की इन उपलब्धियों पर अनेक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया । उन्हें 2021 में छत्तीसगढ़ की प्रमुख साहित्यिक - सांस्कृतिक संस्था शील साहित्य परिषद जांजगीर द्वारा अखिल भारतीय सांस्कृतिक चेतना सम्मान, 2023 में कवि लोक साहित्य परिषद बिलासपुर द्वारा अखिल भारतीय मुक्तिबोध नवचेतना सम्मान, 2021 में ही साकेत साहित्य परिषद सुरगी राजनांदगांव द्वारा साकेत साहित्य सम्मान, राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादह उपसमिति राजनांदगांव , संस्कार काव्य गोष्ठी भिलाई द्वारा सम्मानित किया गया । 2022 में उन्हें भोरमदेव साहित्य सृजन मंच कबीरधाम, भुवाल सती माता मंदिर समिति ग्राम सोनपांडर, तहसील साजा, जिला बेमेतरा, पाठक मंच खैरागढ़ और मितान लोक कलाकार कल्याण संघ राजनांदगांव द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । 2025 ने हरियाणा के साहित्यकार नरेश कुमार स्वामी निम्बार्क की पुस्तक " महंत बने महाराजा " के छुईखदान में आयोजित विमोचन समारोह में " नवरत्न सम्मान " से सम्मानित किया गया है । लुसियाना यूनीवर्सिटी (यूएस) द्वारा बीरेंद्र बहादुर सिंह को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करना वस्तुतः उनके तीन दशक की मूल्यपरक पत्रकारिता एवं साहित्य साधना का सम्मान है ।