सरकारी नाला पाटकर जमीन बेचने की तैयारी
सरकारी नाला पाटकर जमीन बेचने की तैयारी छुईखदान–खैरागढ़ सड़क का मामला, ग्रामीणों में आक्रोश छुईखदान==क्षेत्र में जमीन दलालों की मनमानी लगातार सामने आ रही है, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। छुईखदान–खैरागढ़ मुख्य सड़क किनारे स्थित एक सरकारी एवं अत्यंत प्राचीन नाले को पाटकर जमीन बेचने की तैयारी किए जाने का मामला उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि नाले को मिट्टी और मलबे से भर दिया गया है और अब उसे निजी भूमि बताकर बिक्री की कोशिश की जा रही है।
सरकारी नाला पाटकर जमीन बेचने की तैयारी
छुईखदान–खैरागढ़








(टेकापार)सड़क का मामला, ग्रामीणों में आक्रोश
छुईखदान==क्षेत्र में जमीन दलालों की मनमानी लगातार सामने आ रही है, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। छुईखदान–खैरागढ़ मुख्य सड़क किनारे स्थित एक सरकारी एवं अत्यंत प्राचीन नाले को पाटकर जमीन बेचने की तैयारी किए जाने का मामला उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि नाले को मिट्टी और मलबे से भर दिया गया है और अब उसे निजी भूमि बताकर बिक्री की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार यह नाला कोई नया नहीं, बल्कि दशकों पुराना प्राकृतिक एवं सरकारी जलमार्ग है। इसी नाले से भूलाटोला खार का पानी बहकर कातलवाही बांध तक पहुंचता है, जिससे आसपास के सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। यह नाला क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा की तरह है।
पुरानी पुलिया भी मौजूद, फिर भी पाटने की कोशिश
ग्राम के बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान पर पुरानी पुलिया भी बनी हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह नाला शासकीय अभिलेखों में दर्ज है। बावजूद इसके, जमीन दलालों द्वारा नाले को पाटकर उसे प्लॉट के रूप में बेचने की तैयारी की जा रही है। हालात यह हैं कि खरीददार भी मौके पर आने लगे हैं।
सिंचाई व्यवस्था पर मंडराया खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह नाला पूरी तरह बंद कर दिया गया तो बरसात के दिनों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी और गर्मी के मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा। इससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ेगा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी नाले पर खुलेआम अतिक्रमण होने के बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या यह सब प्रशासन की जानकारी में हो रहा है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से जमीन दलालों के हौसले बुलंद हैं? ग्रामीणों ने मांग की है कि—तत्काल नाले की राजस्व एवं तकनीकी जांच कराई जाए,,पाटे गए हिस्से को तुरंत खाली कराया जाए,,दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए,,भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर सरकारी नाले पर कब्जे का यह खेल यूँ ही चलता रहेगा।।।