प्रधान पाठक बाबूलाल जंघेल हुए सेवानिवृत्त

प्रधान पाठक बाबूलाल जंघेल हुए सेवानिवृत्त ग्रामवासियों और विद्यार्थियों ने दी भावभीनी विदाई शिक्षा के प्रयाय थे बाबूलाल जंघेल,, कोमल जंघेल

प्रधान पाठक बाबूलाल जंघेल हुए सेवानिवृत्त

         

प्रधान पाठक बाबूलाल जंघेल हुए सेवानिवृत्त

     ग्रामवासियों और विद्यार्थियों ने दी भावभीनी विदाई

     शिक्षा के प्रयाय थे बाबूलाल जंघेल,, कोमल जंघेल 

छुईखदान==ग्राम पंचायत कुरेलीकला एवं कुटेलीखुर्द क्षेत्र के लिए शुक्रवार का दिन भावुक क्षणों से भरा रहा। शिक्षा जगत में लगभग 38 वर्षों तक अपनी अमूल्य सेवाएं देने वाले प्रधान पाठक बाबूलाल जंघेल के सेवानिवृत्त होने पर पूर्व माध्यमिक शाला कुटेलीखुर्द में सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया।

                     कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक कोमल जंघेल रहे। समारोह के दौरान विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने बाबूलाल जंघेल के प्रति अपने स्नेह और सम्मान को व्यक्त किया। विदाई के भावुक माहौल में कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

         शिक्षा के पर्याय थे बाबूलाल जी : कोमल जंघेल

        अपने संबोधन में कोमल जंघेल ने कहा कि बाबूलाल जंघेल ने समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य संवारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल जी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि शिक्षा के पर्याय थे। उनकी मेहनत और लगन ने क्षेत्र में शिक्षा की मजबूत नींव रखी तथा कुरेलीकला एवं आसपास के गांवों को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई।

                     38 वर्षों की गौरवशाली सेवा

      विदाई अवसर पर बाबूलाल जंघेल ने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 38 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया। उनकी पहली नियुक्ति त्रिपुर घुमका में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने छुईखदान, गभरा, घिरघोली, बेलगांव, भारदागोंड़, नवागांव सहित विभिन्न विद्यालयों में सेवाएं दीं और अंततः अपने गृह क्षेत्र कुटेलीखुर्द से सेवानिवृत्त हुए।

         उन्होंने कहा, “मैंने अपने पूरे सेवा काल में पढ़ाई और विद्यार्थियों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। शिक्षा के प्रति कभी समझौता नहीं किया। मेरे क्षेत्र के छात्र-छात्राएं इसके साक्षी हैं।”

                   विद्यालय परिवार ने भी उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी और अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ निर्वहन किया।

                   समारोह के अंत में बाबूलाल जंघेल को स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र भेंट कर उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना की गई। ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए भावभीनी विदाई दी।इस अवसर पर उनके पुत्र डॉ. दुष्यंत जंघेल, कुलेश्वर जंघेल, लोकेश ठाकुर (प्राचार्य), शिवेंद्र त्रिपाठी (व्याख्याता), प्रकाश बघेल, दिनेश महोबिया, सुनीता गुप्ता, अश्वनी साहू, रूखमणि जांगड़े, कोमल यादव, मनीष वर्मा, नवनिहाल करचाल, प्रमोद यादव, तीरथ जंघेल, शिवनारायण धनकर, केशव वर्मा, डाकेश्वर वर्मा, रवि वर्मा, संतोष श्रीवास, पदमिनी चंदेल, मनीराम जंघेल, आशाराम पटेल, द्वारका जंघेल, संतराम जंघेल, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, कुटेलीखुर्द की सरपंच कल्याणी जंघेल तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।