छुईखदान का अपमान बर्दाश्त नहीं ट्रेज़री का अधिकार छीना जनता में उबाल

छुईखदान का अपमान बर्दाश्त नहीं! ट्रेज़री का अधिकार छीना, जनता में उबाल प्रशासन की मनमानी के खिलाफ फूटेगा जनआक्रोश, बड़े आंदोलन के संकेत “छोटे राजा” देवराज किशोर दास का ऐलान—अब आर-पार की लड़ाई तय क्या 09 जनवरी 1953 जैसे हालात फिर दोहराने की साजिश ?,?,?,?,

छुईखदान का अपमान बर्दाश्त नहीं  ट्रेज़री का अधिकार छीना जनता में उबाल

छुईखदान का अपमान बर्दाश्त नहीं! ट्रेज़री का अधिकार छीना, जनता में उबाल

प्रशासन की मनमानी के खिलाफ फूटेगा जनआक्रोश, बड़े आंदोलन के संकेत

“छोटे राजा” देवराज किशोर दास का ऐलान—अब आर-पार की लड़ाई तय

क्या 09 जनवरी 1953 जैसे हालात फिर दोहराने की साजिश ?,?,?,?,

छुईखदान == प्रशासन के तानाशाही फैसले ने पूरे नगर में आग लगा दी है। ट्रेज़री से अधिकार छीनकर छुईखदान को सिर्फ एक “रबर स्टाम्प” बनाकर छोड़ दिया गया है। यह फैसला सीधे-सीधे जनता के अधिकारों पर हमला है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आज हालात यह हैं कि आम जनता को छोटे-छोटे काम—स्टांप, ज्यूडिशियल-नॉन ज्यूडिशियल, कोर्ट फीस और नोटरी टिकट के लिए भी खैरागढ़ के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गरीब, किसान और ग्रामीण वर्ग इस फैसले से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं, लेकिन प्रशासन को उनकी परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं दिख रहा। ज्ञात हो कि छुईखदान में स्थापित उप कोषालय (ट्रेज़री ऑफिस) को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अंततः जिला कोषालय खैरागढ़ में मर्ज कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत उप कोषालय से जुड़े अधिकांश दस्तावेज और सामग्री भी चुपचाप खैरागढ़ भेज दी गई।

         इस फैसले के बाद अब छुईखदान और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रसीद टिकट और स्टाम्प पेपर जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी खैरागढ़ का रुख करना पड़ेगा, जिससे आम जनता को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

                 स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने बार-बार गुहार लगाई, आवेदन दिए, लेकिन प्रशासन ने सब कुछ नजरअंदाज कर दिया। यह साफ दर्शाता है कि जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

            नगर में गुस्सा अब उबाल पर है। लोग इसे अपने हक और सम्मान पर सीधा हमला मान रहे हैं। हालात तेजी से विस्फोटक बनते जा रहे हैं और कभी भी बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।

     इसी बीच “छोटे राजा” देवराज किशोर दास ने खुली चेतावनी देते हुए कहा— देवराज किशोर दास का विरोध

जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष देवराज किशोर दास ने इस निर्णय का कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला उनके निकम्मेपन को उजागर करता है।

            देवराज किशोर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में छुईखदान को संयुक्त जिले में शामिल कराने के लिए दबाव बनाया गया था और यदि कांग्रेस की सरकार होती तो यहां जिला स्तर के कई कार्यालय संचालित होते। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने सभी प्रमुख कार्यालय खैरागढ़ में केंद्रित कर दिए और अब छुईखदान के कार्यालयों को भी वहां मर्ज किया जाने लगा है।

         उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छुईखदान की जनता द्वारा दिए गए भारी समर्थन का यही परिणाम है कि उनके क्षेत्र से सरकारी सुविधाएं छीनी जा रही हैं?देवराज ने भाजपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे केवल “जिंदाबाद” और “जीहुजूरी” में समय व्यर्थ न करें, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास और अधिकारों के लिए ठोस प्रयास करें।“अगर यह काला फैसला तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो छुईखदान की जनता सड़कों पर उतरकर जवाब देगी। यह लड़ाई अब आर-पार की होगी और अन्याय के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाएगा।”