पान उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बनीं छुईखदान की महिलाएँ
पान उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बनीं छुईखदान की महिलाएँ कृषि महाविद्यालय छुईखदान की विशेष उपलब्धता जय माँ बम्लेश्वरी महिला समूह की प्रेरणादायी सफलता प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मिल रहा सहयोग

पान उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बनीं छुईखदान की महिलाएँ
कृषि महाविद्यालय छुईखदान की विशेष उपलब्धता
जय माँ बम्लेश्वरी महिला समूह की प्रेरणादायी सफलता
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मिल रहा सहयोग
छुईखदान====ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है जय माँ बम्लेश्वरी महिला स्वयं सहायता समूह, जिसने पान आधारित उत्पादों के नवाचार और विपणन के जरिए न सिर्फ अपनी पहचान बनाई है, बल्कि पूरे क्षेत्र में महिला उद्यमिता को नई दिशा दी है। पान अनुसंधान केंद्र, छुईखदान को भी इन उपलब्धियों के लिए व्यापक सराहना मिल रही है।
राज्योत्सव में मिली सराहना
हाल ही में खैरागढ़ और रायपुर में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रमों में समूह की महिलाओं ने पान रिफ्रेश, पान लड्डू, पान हर्बल टी और पान चॉकलेट जैसे आकर्षक उत्पादों की बिक्री कर 22 हजार रुपए से अधिक की आय अर्जित की। यह सफलता महिलाओं की मेहनत, प्रशिक्षण और टीमवर्क का प्रमाण मानी जा रही है।
कलेक्टर के मार्गदर्शन से मजबूत हुआ पान अनुसंधान केंद्र
कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रावल तथा जिला पंचायत सीईओ श्री प्रेम कुमार पटेल के निर्देशन में समूह को आधुनिक व आकर्षक पैकेजिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
पान अनुसंधान केंद्र, छुईखदान के विशेषज्ञ डॉ. बी.एस. असाटी और डॉ. खुशबू टंडन द्वारा सात दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
जनप्रतिनिधियों का सहयोग और पान खेती को बढ़ावा
शुरुआती चुनौतियों—उत्तम पान उपलब्धता, संरक्षण और बाजार तक पहुंच—को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के तकनीकी सहयोग से दूर किया गया।पान की खेती बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधि श्री सज्जाक खान, श्री संजय महोबिया, श्रीमती पार्तिका महोबिया तथा उद्यानिकी विभाग, खैरागढ़ द्वारा किसानों को बरेजा निर्माण व पान संवर्धन हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
उत्पादों की गुणवत्ता, ताजगी और पैकेजिंग को उपभोक्ताओं से मिली सराहना ने महिलाओं के उत्साह में और वृद्धि की है। बढ़ती मांग को देखते हुए जिला प्रशासन जल्द ही छुईखदान में ‘पान कैफ़े’ शुरू करने की तैयारी में है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने 13 अगस्त 2025 के जिले के प्रवास के दौरान की थी।
महिला समूह की एकजुटता बनी सफलता की कुंजी
समूह की सदस्य श्रीमती आशा महोबिया और श्रीमती त्रिप्ती वैष्णव बताती हैं कि पान आधारित उत्पादों से होने वाली आमदनी से परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।पान में मौजूद कैल्शियम, थायमिन, नियासिन और विटामिन-C जैसे तत्व इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी बनाते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र सुधारने में मदद करते हैं।
रानी अवंतीबाई लोधी कृषि महाविद्यालय, छुईखदान द्वारा समूह को विपणन, मूल्य निर्धारण और बिक्री तकनीकों में विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। इस सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र की अन्य महिलाएँ भी प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हैं।
भविष्य की योजनाएँ




समूह आने वाले महीनों में उत्पादन बढ़ाने, नए वैल्यू-ऐडेड पान उत्पाद विकसित करने और अपने ब्रांड को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।यह पहल ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बनकर उभर रही है