छेर छेरा की किलकारियों से गूंजा नगर व मोहल्ला
छेर छेरा की किलकारियों से गूंजा नगर व मोहल्ला नन्हे बच्चों की छेर-छेरा पार्टी ने बांधी खुशियों की डोर राजमहल गार्डन पहुंचकर बच्चों ने छेरी छेरा का आनंद उठाया
छेर छेरा की किलकारियों से गूंजा नगर व मोहल्ला
नन्हे बच्चों की छेर-छेरा पार्टी ने बांधी खुशियों की डोर
राजमहल गार्डन पहुंचकर बच्चों ने छेरी छेरा का आनंद उठाया
छुईखदान== पुन्नी का महीना शुरू होते ही बच्चों के चेहरों पर अलग ही रौनक दिखाई देने लगती है। यह वही समय होता है जब छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से जुड़ा मधुर पर्व छेर-छेरा बच्चों के माध्यम से घर-घर पहुंचता है।
छोटे-छोटे बच्चों ने अपने-अपने समूह बनाकर ,,छेर-छेरा” की मासूम आवाज़ के साथ नगर व मोहल्ले में दस्तक दी। बच्चों की खिलखिलाहट, उत्साह और पारंपरिक अंदाज़ ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया है।और बच्चे अपने मोहल्ले के हर घर पर दस्तक देकर छेर-छेरा को खुशियों को हर घर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे है।
आज पुन्नी लगते ही बच्चों ने अपनी टोली बनाकर नगर व मोहल्ले में अचानक पहुंचे बच्चों के एक समूह में कु,एंजल, कु,रोशनी, कु, उजाला, कु,माही, कु,निशु और कु,नफीसा शामिल थी। इन नन्हे कलाकारों ने अपनी चंचलता और खुशमिज़ाज अंदाज़ से पूरे मोहल्ले में उत्सव सा माहौल बना दिया।
बच्चों की ग्रुप पहुंचा राजमहल गार्डन
छेरी छेरा नाचने वाले बच्चे नगर में घुमते घुमते राज महल मैरिज गार्डन पहुंचे ।जहा पर उनकी मुलाकात किसान कांग्रेस के अध्यक्ष छोटे राजा देवराज किशोर दास से हुईं।उन्होंने बच्चों के साथ ठहाका लगाते हुए बच्चों को नाचने के लिए कहा ।और स्वयं भी बच्चों के साथ थिरकने लगे फिर बच्चों को पारितोषिक देकर रवाना किए।बच्चों की हठ देखकर छोटे राजा साहब दिन भर उनकी चर्चा करते रहे।और कहा कि ये छोटे छोटे त्यौहार हमे अपनी संस्कृति की याद दिलाता है ।



ग्रामीण संस्कृति की इस सुंदर परंपरा में बड़ों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और बच्चों को छेर-छेरा देकर लोकपर्व की गरिमा को आगे बढ़ाया है। यह दृश्य न सिर्फ संस्कृति को जीवंत करता है, बल्कि बचपन की यादों को भी ताज़ा कर देता है