भारतीय स्टेट बैंक की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ता त्रस्त

भारतीय स्टेट बैंक की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ता त्रस्त पाँच कर्मचारियों के भरोसे चल रही शाखा, लोकल चेक क्लियर में 10–15 दिन की देरी

भारतीय स्टेट बैंक की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ता त्रस्त

भारतीय स्टेट बैंक की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ता त्रस्त

          पाँच कर्मचारियों के भरोसे चल रही शाखा,

       

लोकल चेक क्लियर में 10–15 दिन की देरी

छुईखदान === वर्षों पुरानी मांग के बाद नगर पंचायत छुईखदान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा तो खुल गई, लेकिन वर्तमान में बैंक की कार्यप्रणाली उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। बैंक की अव्यवस्थित व्यवस्था से ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

                   स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पूरी शाखा महज पाँच कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही है, जिससे रोजमर्रा के बैंकिंग कार्यों में भारी विलंब हो रहा है। सबसे गंभीर समस्या लोकल बैंकों के चेक क्लियरेंस को लेकर सामने आ रही है। नगर में स्थित अन्य बैंकों की दूरी मात्र 500 मीटर होने के बावजूद चेक क्लियर होने में 10 से 15 दिन तक का समय लग रहा है।

             ग्राहकों का आरोप है कि जब वे इस संबंध में बैंक कर्मचारियों से जानकारी लेने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें टालमटोल भरे जवाब दिए जाते हैं। कई बार कर्मचारी सवालों से बचते नजर आते हैं और ग्राहकों से दूरी बना लेते हैं।

                  इस बदहाल व्यवस्था से क्षेत्र के स्टेट बैंक ग्राहक खासे नाराज हैं। उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठने लगा है कि जब बुनियादी बैंकिंग सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो आखिर वे स्टेट बैंक से लेन-देन क्यों करें?

            स्थानीय नागरिकों ने बैंक प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने, चेक क्लियरेंस प्रक्रिया को तेज करने तथा ग्राहक सेवा में सुधार की मांग की है।

एक स्थानीय ग्राहक, जो कि छोटा व्यवसाई है, ने बताया कि उसे पैसों की तत्काल जरूरत थी। उसने बैंक में चेक जमा किए नौ–दस दिन बीत जाने के बाद भी उसके खाते में राशि जमा नहीं हुई, जिससे उसका व्यवसाय प्रभावित हुआ और उसे भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

           ऐसे ही कई अन्य उपभोक्ता हैं, जो स्टेट बैंक की कार्यशैली से परेशान हैं। अब उपभोक्ता बैंक कर्मचारियों की शिकायत उच्च कार्यालय में करने का मन बना रहे हैं।ग्राहकों का कहना है कि यदि स्टेट बैंक में किसी अन्य बैंक का चेक जमा किया जाए और पैसों की जरूरत हो, तो ग्राहक भगवान भरोसे ही रह जाता है, क्योंकि यह तय नहीं होता कि जमा की गई राशि खाते में कब पहुंचेगी।