मानव के मानवता में होते हैं गोविंद आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी
मानव के मानवता में होते हैं गोविंद आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी पुरुषोत्तम मास में श्रीधाम वृन्दावन में श्रीमद्भागवत कथा में अलौकिक व्याख्यान
मानव के मानवता में होते हैं गोविंद आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी




पुरुषोत्तम मास में श्रीधाम वृन्दावन में श्रीमद्भागवत कथा में अलौकिक व्याख्यान
छुईखदान। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीधाम वृन्दावन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध ज्योतिषाचार्य एवं कथा वाचक आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी ने अपने अलौकिक प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। छुईखदान सहित आसपास क्षेत्रों एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिष्य एवं भक्तगण कथा श्रवण हेतु वृन्दावन पहुंचे।
कथा के द्वितीय दिवस में आचार्य शास्त्री जी ने कहा कि “मानव के मानवता में ही गोविंद का वास होता है।” कथा के दौरान एक श्रोता ने बार-बार गोविंद के प्रत्यक्ष होने का प्रमाण मांगा। इस पर कथा वाचक ने अपनी घंटी से श्रोता के पैर पर हल्का प्रहार किया। पीड़ा महसूस होने पर जब श्रोता ने प्रश्न किया, तब आचार्य जी ने समझाया कि जिस प्रकार हम शरीर के भीतर होने वाली पीड़ा को देख नहीं सकते, केवल अनुभव कर सकते हैं, उसी प्रकार गोविंद को भी अनुभव किया जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन भर प्रभु के नाम का जाप करते हुए ईश्वर मिलन की आशा बनाए रखनी चाहिए।
आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी ने कहा कि सनातन धर्म के मनीषियों, सिद्ध संतों, ब्रज के रसिक भक्तों और श्रीमद्भागवत पुराण के रचनाकारों ने कलियुग में नाम जाप को सबसे बड़ी तपस्या बताया है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण को भवसागर से पार लगाने वाला महान ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें वेद, पुराण, उपनिषद, गीता, श्रुति एवं स्मृति का सार समाहित है। विशेष रूप से वृन्दावन और तीर्थराज नैमिषारण्य जैसे पावन स्थलों पर कथा श्रवण का प्रभाव मानव जीवन पर अत्यंत दिव्य एवं कल्याणकारी होता है।
अपने प्रवचन में उन्होंने देवर्षि नारद जी की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिनके मुख से निरंतर “नारायण-नारायण” का जाप होता है, उनसे भूल संभव नहीं। वे तो भगवान की इच्छा के अनुसार ही लोककल्याण के कार्य करते हैं। आचार्य जी ने कहा कि सच्चा भक्त कभी किसी का अहित नहीं चाहता। वह दीन-दुखियों के दुःख में दुखी होता है और दूसरों की खुशी में आनंद अनुभव करता है। भक्त अपना सर्वस्व दान कर देने के बाद भी इस विश्वास में प्रसन्न रहता है कि “सबकुछ चला जाए, पर गोविंद मेरे साथ हैं।”
पुरुषोत्तम मास की महत्ता बताते हुए आचार्य जी ने सनातन तीर्थों की आध्यात्मिक शक्ति एवं उनके प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कथा श्रवण, सत्संग, दान, जप, पाठ और तीर्थाटन के महत्व को बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सांसारिक जीवन में कर्म आवश्यक हैं, उसी प्रकार आत्मकल्याण के लिए साधु-संगत और सत्संग भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपनी क्षमता के अनुसार तीर्थाटन करने का आग्रह किया और कहा कि आज भी तीर्थस्थलों पर देवी-देवता एवं संत विभिन्न स्वरूपों में विचरण करते हैं, जिनके दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है।
कथा सुनने पहुंचे शिष्य संजीव दुबे एवं श्रीमती श्रद्धा दुबे ने भी अपने मित्रो के साथ कथा प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर मित्रो का मन मोह लिया।
उल्लेखनीय है कि आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री जी ने रायपुर के समीप ग्राम सिलियारी को अपना निवास स्थान बनाया है, जहां वे माता रानी की कृपा से चावल देखकर वर्तमान, भूत एवं भविष्य की सटीक जानकारी देने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे अपनी श्रीमद्भागवत कथा से प्राप्त दक्षिणा एवं सामग्री को गरीब कन्याओं की शिक्षा एवं विवाह में दान कर देते हैं। बताया जाता है कि अब तक वे 500 से अधिक कन्याओं के जीवन कल्याण में सहयोग कर चुके हैं। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है।कथा व्यास ने जानकारी दी कि आगामी समय में श्रावण मास में तीर्थराज नैमिषारण्य में भी श्रीमद्भागवत कथा आयोजन संभावित है।