अपने लिए नहीं दूसरों के लिए अच्छा बनें उदित मुनि नाम साहेब

अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए अच्छा बनें—उदित मुनि नाम साहेब उदित साहेब की बंदगी में छुईखदान में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब शाकाहार, जीवदया और मानवता पर दिया जोर राजपरिवार का आतिथ्य स्वीकार कर पहुंचे राजमहल सत्यनाम संदेश, गुरुदीक्षा और चौका आरती में हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

अपने लिए नहीं दूसरों के लिए अच्छा बनें     उदित मुनि नाम साहेब

अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए अच्छा बनें—उदित मुनि नाम साहेब

उदित साहेब की बंदगी में छुईखदान में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब

शाकाहार, जीवदया और मानवता पर दिया जोर

राजपरिवार का आतिथ्य स्वीकार कर पहुंचे राजमहल

सत्यनाम संदेश, गुरुदीक्षा और चौका आरती में हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

छुईखदान== कबीरपंथ मानवता का पंथ है और आज का यह आयोजन किसी एक व्यक्ति अथवा किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता का आयोजन है। कबीरपंथ का आधारभूत सिद्धांत है कि कोई भी कबीरपंथी अपने लिए अथवा अपने किसी पंथी के लिए अच्छा बनने से पहले दूसरों के लिए अच्छा बनने का प्रयास करे। यह उद्गार कबीरपंथ के सोलहवीं पीढ़ी के ध्वजवाहक पंथ श्री हुजूर उदित मुनि नाम साहेब ने छुईखदान में आयोजित एक दिवसीय संत समागम के दौरान व्यक्त किए।

                   उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ दया और प्रेमभाव से रहना चाहिए, न कि उनके विनाश का कारण बनना चाहिए। उन्होंने शाकाहार और जीवदया पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य को प्रकृति ने सोचने-समझने की शक्ति दी है, जबकि अन्य जीव अपने जीवन की रक्षा के लिए मनुष्य पर निर्भर नहीं हो सकते। ऐसे में मनुष्य का दायित्व है कि वह जीवों के प्रति दया रखे और उन्हें भी स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अवसर दे।

===600 वर्षों से मानवता का संदेश दे रहा कबीरपंथ===

छुईखदान के ऐतिहासिक रियासतकालीन नगर में पहली बार पधारे उदित मुनि नाम साहेब ने कहा कि कबीरपंथ छह सौ वर्षों से अधिक समय से मानवता की स्थापना और सामाजिक जागृति का संदेश घर-घर और गांव-गांव तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि मानवता की पुनर्स्थापना के लिए कबीरपंथ के कार्यक्रमों को और अधिक सुगम एवं संगठित किया जाएगा।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की परंपरा सदैव प्रकृति के प्रति संवेदनशील रही है। जीवों के प्रति दया, संरक्षण और संवर्धन की भावना छत्तीसगढ़ की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसी भावना के आधार पर उत्कृष्ट मानव समाज की स्थापना की जा सकती है।

====साहेब की एक झलक पाने उमड़ा जनसैलाब====

संत समागम के ऐतिहासिक आयोजन को लेकर छुईखदान नगर सहित पूरे क्षेत्र के कबीरपंथियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग भी आयोजन में पहुंचे। श्रद्धालुओं में हुजूर साहेब की एक झलक पाने और उनके प्रवचन सुनने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।

===नगर भ्रमण के दौरान राजमहल पहुंचे हुजूर साहेब===

छुईखदान आगमन के प्रथम चरण में हुजूर साहेब का भव्य नगर भ्रमण हुआ। इस दौरान करीब हजारो की संख्या में श्रद्धालु, शिष्य और अनुयायी बाजे-गाजे के साथ नगर भ्रमण में शामिल हुए। माताओं ने सिर पर कलश धारण कर यात्रा में सहभागिता की। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।इस अवसर पर छुईखदान रियासत की ओर से राजमहल पधारने के आग्रह को पंथ श्री हुजूर उदित मुनि नाम साहेब ने स्वीकार किया और राजपरिवार का आतिथ्य ग्रहण किया।

जिसमें राजमाता राजश्री देवी राजा गिरिराज किशोर दास रानी नम्रता देवी छोटे राजा देवराज किशोर दास संहित पूरा राज परिवार और नगरवासियों ने उदित मुनि नाम साहब का स्वागत किया ।

  ===श्रद्धालुओं के लिए सतत चलता रहा भंडारा===

ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने के लिए क्षेत्र के विभिन्न गांवों और नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचे। साहेब की एक झलक पाने, उनके दिव्य प्रवचन सुनने और उनके साक्षित्व में होने वाली चौका आरती में शामिल होने के लिए लोगों ने अपने दैनिक कार्यों को भी पीछे रखा। कार्यक्रम में पहुंचे समस्त श्रद्धालुओं के लेकर लगातार भंडारा चलते रहा ।श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए आयोजन स्थल पर एक दिन पूर्व से ही सतत भंडारे की व्यवस्था की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

==विशाल चौका आरती और गुरुदीक्षा में उमड़े श्रद्धालु==

केकतीबाड़ी मैदान में पंथ श्री उदित मुनि नाम साहेब के संरक्षण में क्षेत्र का विशाल चौका आरती एवं गुरुदीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदीक्षा ग्रहण कर शिष्यत्व प्राप्त किया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने चौका आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

===जनप्रतिनिधियों सहित हजारों लोग हुए शामिल===

संत समागम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में छुईखदान के राजा गिरिराज किशोर दास छोटे राजा देवराज किशोर दास यशोदा वर्मा विधायक जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, खम्मन ताम्रकार जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू, पूर्व विधायक कोमल जंघेल, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सज्जाक खान जिला लोधी समाज अध्यक्ष उत्तम जंघेल घम्मन साहू विशेषर साहू रिंकू गुप्ता हेमलाल टी, के, चंदेल दशमथ जंघेल गजेंद्र ठाकरे हेमंत वैष्णव संतु धर्मगुड़े भीखू हिरवानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

     संत समागम के दौरान पूरे छुईखदान में आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा और हजारों श्रद्धालुओं ने पंथ श्री हुजूर उदित मुनि नाम साहेब के दर्शन एवं आशीर्वचन प्राप्त किए।

        ======   बारिश ने किया अवरोध====

जैसे ही हुजूर उदित मुनिनाम साहेब प्रवचन शुरू किए थे कुछ ही क्षणों पश्चात बारिश शुरू हो गया जिससे कार्यक्रम कुछ देर के लिए रुके रहा बारिस थामने के बाद ही कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया।जो देर रात्रि तक चला। कार्यक्रम में लगभग 20 हजार के आसपास श्रद्धालु पहुंचे जिसके कारण पूरा शहीद नगरी कबीर समाज के संत समागम समारोह से ओतप्रोत रहे। ।

कार्यक्रम को सफल बनाने में गुमान सिन्हा बिसेसर दास, निरंता साहेब दास, लता साहू, रविदास पुरुषोत्तम दास, पवन दास, भुनेश्वर दास, झूमुक दास, देवकरण वर्मा, तमेश्वर दास, मिथलेश दास, लखन दास, जनक दास, राधेश्याम देवशरण संतु धर्मगढ़े योगेश झरिया रामजी पटेल लेखु सहित कबीरपंथ से जुड़े गांव-गांव के अनेक अनुयायी का सहयोंग रहा ।