मक्का मदीने की जियारत पर निकले सैयद आबिद अली सैयद माजिद अली

मक्का मदीने की जियारत पर निकले सैयद आबिद अली सैयद माजिद अली छुईखदान शहर से चार लोग उमराह की लिए रवाना हुए सैयद फैमिली को रवानगी दी नगर वासियो ने वतन की सलामती की दुआवों के तलबगार हैँ नगरवासी

मक्का मदीने की जियारत पर निकले  सैयद आबिद अली सैयद माजिद अली

मक्का मदीने की जियारत पर निकले सैयद आबिद अली सैयद माजिद अली 

छुईखदान शहर से चार लोग उमराह की लिए रवाना हुए 

सैयद फैमिली को रवानगी दी नगर वासियो ने 

वतन की सलामती की दुआवों के तलबगार हैँ नगरवासी 

छुईखदान =-=- मुस्लिम धर्म के मानने वालो का सबसे बड़ा मकसद एक मर्तबा मक्का मदीने की जियारत करना होता है जिसे हज कहा जाता है लेकिन जो हज पर नहीं जा पाते वे उमराह करते हैं l 

      सैयद फैमिली उमराह के लिए हुए रवाना 

 वैसे तो हर साल साल के आखिरी महीने में मुसलमान भाई अपने सबसे बड़े तीर्थ स्थल मक्का मदीना की जियारत के लिए जाना चाहते है लेकिन किसी कारण से उनका जाना नहीं हो पाया तो वे उमराह करने के लिए रवाना हो जाते है जिसमें छुईखदान शहर के सैय्यद आबिद अली की फैमिली भी उमराह के लिए रवाना हुए,जिसमे सैय्यद आबिद अली के साथ उनकी अहिल्या शमशाद बेगम और उनके बेटे सैयद माजिद अली और उनकी बहु नगमा खान दिनांक 11दिसंबर को उमराह के लिए छुईखदान शहर से रवाना हुए l 

 

    उक्त यात्रा पर जाने से पूर्व जिला मुस्लिम समाज के अध्यक्ष सज्जाक खान और मुस्लिम जमात छुईखदान के अध्यक्ष शेख़ निजमुद्दीन व नगर के लोगो ने उनके सफल उमराह यात्रा के लिए व वतन की सलामती की दुआ के साथ उनको विदाई दी हैl जहाँ पर हजरत सैयद बाबा गुलाब शाह रह, अ, में फातिहा पढ़कर शहर और वतन की सलामति की दुआ की गईं l 

             इस अवसर पर जिला मुस्लिम समाज के अध्यक्ष सज्जाक खान सहित शहर के हाफिज सरीफुल हक जामा मस्जिद छुईखदान के मुतवल्ली शेख़ निजमुद्दीन मोहम्मद हाफिज इलियास अहमद हाजी यूसुफ सोलंकी आशु खान अख़्तर सोलंकी इमरान खान शेख़ इब्राहिम हाजी आज़म खान शेख़ समीर साजिद अली जफर अली राशिद भाई मोहम्मद अर्श मोहम्मद आज़म आफरीदी खान आदिल खान अब्बास खान शेख़ फरीद रेहान बाबा हाजी सरवर अहमद रशीद भाई साहिर खान अज्जू खान कम्मू खान सहित शहर के सामाजिक बंधुओं ने सैयद फैमिली से मिलकर वतन की सलामति की दुआ के लिए गुजारिश की l 

 सलामती व सफल यात्रा की दुआओ के साथ रूखसत किया गया । 

            

               जमात के ईमाम हाफ़िज़ सरिफुल हक़ ने समस्त मुसलमान भाईयों केा सम्बोधित करते हुए

कहा कि ईस्लाम के अनुसार हर एक मुसलमान को यह कोशिश करना चाहिए कि वह अपने पूरे जीवन मे सिर्फ ईमान के साथ जीवन यापन करे अपने वतन के लिए जीये और अपनी ईमान की कमाई से राशि बचाकर रखे और उसी राशि से वह हज करें , और उमराह की यात्रा करे और अल्लाह के बताए मार्ग पर चले। क्योकि ईस्लाम के अनुसार अल्लाह बडा ही रहम वाला है।यही कारण है कि वह अपने हर चाहने वालों को अपने घर तक का बुलावा देता है l